Hindi Short Story for class 2 - आलसी लड़का - Lazy Boy

Hindi Short Story for class 2 - आलसी लड़का - Lazy Boy


Hindi Short Story for class 2 – Hello dear readers, today I am presenting a Hindi Short Story with moral for class 2 of not to be lazy. This short story in Hindi with moral for kids has a moral value for kids. I hope you’ll like this Hindi Story with moral

Shot Story in Hindi with Moral for Kids - आलसी लड़का


Hindi Short Story for class 2



एक गांव में एक अमीर व्यक्ति रहते थे। वह काफी अमीर थे। ( Hindi Short Story for class 2 ) वह अमीर तो थे ही पर साथ में बहुत मेहनती भी थे। उनके कई सारे अस्तबल थे, अच्छी-खासी व्यापार थी। उनका व्यापार बहुत अच्छा चलता था और काफी मुनाफा भी होता था। वह प्रतिदिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठते। 

स्नानादि करके सर्वप्रथम वह मंदिर जाया करते। फिर मंदिर के बाद वह एक बार अपने सारे अस्तबल का चक्कर लगाते। और फिर सारे कुछ की निगरानी करने के बाद वह अपने दुकान पहुंचते। दिन भर कहां हो कड़ी मेहनत से काम करते और शाम को अपने घर आते। उनकी प्रतिदिन कि यही दिनचर्या थी। 

इस अमीर व्यक्ति का एक पुत्र भी था। परंतु वह अपने पिता के ठीक उल्टा था। ( Short Story in Hindi with Moral for kids ) जहां उसके पिता मेहनती थे वह उतना ही बड़ा अलसी था। वह प्रातकाल भी देरी से उठता वह अपने पिता की कोई सहायता नहीं करता था। कई बार उसके पिता ने प्रातः काल अपने साथ अपने पुत्र को भी अपने व्यापार पर ले जाना चाहा। परंतु का हर बार कोई ना कोई बहाना बनाकर अपने पिता के साथ जाने से बच जाता और सोया रह जाता। 

उसके पिता उससे बहुत परेशान रहते थे। एक दिन अचानक उसके पिता की तबीयत खराब हो गई। और कुछ ही दिनों में उनका देहांत भी हो गया। अब व्यापार और घर को संभालने की सारी जिम्मेदारी उस लड़के पर आ गई। क्योंकि वह लड़का कभी अपने पिता के साथ दुकान पर गया नहीं था। कभी उसने अपने पिता की मदद की नहीं थी। इसीलिए उसे व्यापार के बारे में कुछ भी नहीं पता था। 

जिस वजह से अब उन्हें व्यापार में भारी नुकसान होने लगा। ( Hindi Short Story with moral for class 2 ) धीरे-धीरे उनकी सारी संपत्ति खत्म होती चली गई और वह गरीब होते गए। उसकी मां ने उसे बहुत बार कहा कि तुम काम पर जाओ परंतु बदल गया क्या कर डाल देता कि उसे तो कुछ आता ही नहीं। 

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तब उसकी मां ने उस लड़के को उसके पिता के सहयोगी के पास भेजा। उसकी मां ने उससे कहा कि वह तुम्हें व्यापार के बारे में सब कुछ सिखा देंगे। वह तुम्हारे पिता के सहयोगी थे और तुम्हारे पिता के सबसे विश्वासी व्यक्ति भी थे। इसीलिए तुम्हें उनके पास जाना चाहिए। 

लड़का मां की बात मान कर अपने पिता के विश्वासी सहयोगी के पास पहुंचा। ( Short Story in Hindi with pictures ) उसने उनसे सारी परेशानियां बताएं। उसने कहा कि उसके पिता के जाने के बाद व्यापार में भारी नुकसान हो रहा है। वह अपने व्यापार को कैसे ठीक करें। कैसे फिर से पहले की तरह अमीर बने। तो उसके पिता के सहयोगी ने उसे बताया कि जिस तरह तुम्हारे पिता प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर मंदिर फिर अपने अस्तबल का निरीक्षण करते थे और फिर वह दुकान पहुंचते थे, तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए। 

लड़का उनकी बात मान गया वाह अगले दिन सेवा प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर मंदिर जाता फिर अपने अस्तबल के चक्कर लगाता और अंत में दुकान पर पहुंचता। उसने ठान लिया था कि अब वह अपने आलस को छोड़ देगा। वह अब प्रतिदिन अपने पिता का दिनचर्या दोहराता। 

तभी एक दिन जब वह सुबह अपनी दुकान पहुंचा तो उसने देखा कि उसकी दुकान के कुछ मजदूर चुपके से दुकान से कुछ सामान निकाल कर अपने साथ ले जा रहे हैं। ( Short Hindi Story with moral for class 2 ) यह देखकर वह लड़का बिल्कुल चकित रह गया। उसने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा वार्ड उनसे पूछताछ की। पूछताछ करने पर जो खुलासा हुआ उससे बिल्कुल चकित रह गया। 

उस मजदूर ने उसे बताया कि उसके पिता की मृत्यु के बाद दुकान की निगरानी कोई नहीं करता था। जब आपकी पिता थे तो वह खुद हर एक चीज पर अपनी नजर रखते थे। उस वक्त कोई भी व्यक्ति ऐसे सामान चोरी नहीं करता था। क्योंकि उन्हें पकड़े जाने का डर होता था। परंतु उनकी मृत्यु के बाद यहां कोई नहीं आता, कोई यहां निगरानी नहीं करता था। ( Hindi Short Moral Story with Pictures ) इसीलिए अब किसी को भी पकड़े जाने का डर नहीं रहा। सारा कुछ वहां काम कर रहे लोगों के हाथों में था। उन्हें किसी का डर नहीं था इसीलिए वह अपनी मनमर्जी से कभी भी कोई भी सामान दुकान से अपने घर ले जाते। इसी वजह से आपको व्यापार में नुकसान हो रहा था। 

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उस मजदूर की यह बात सुनकर वह लड़का बिल्कुल अचंभित रह गया। ( Hindi Short Story for class 2 with moral for kids ) और उसने उसे सजा के तौर पर नौकरी से निकाल दिया। वह लड़का प्रतिदिन अपनी हर एक व्यापार पर नजर रखता। धीरे-धीरे वह भी अपने पिता की तरह मेहनती होता चला गया मोर फिर से वो पहले की तरह अमीर हो गया। 

सीख:- 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी हालत में किसी भी काम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आलस्य हमारी विफलता का सबसे बड़ा कारण है। हमें आलस नहीं करना चाहिए। 

Moral of this Hindi Short Story for class 2 with pictures:- 

We learn from this story that we should never ignore any work in any condition. Laziness is the biggest reason for our failure. We should not be lazy. 

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Thank you so much for reading this Hindi Short Story with moral for class 2. I hope you liked this short story in Hindi with moral for kids with pictures. If you liked this Hindi Short Story for class 2 please do comment and feel free to share your thoughts. You will find many more motivational stories in Hindi, moral story in Hindi etc. on this site.

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