Hindi Short Story for Kids with Moral - बुद्धिमान पुत्र - Intelligent Son

Hindi Short Story for Kids with Moral - बुद्धिमान पुत्र - Intelligent Son

Hindi Short Story for Kids : Hello dear readers, today I am sharing a Hindi short story for kids with moral titled as "Budhimaan Putra". This short story in Hindi with moral has a very important moral value for kids. I hope you will like this Hindi short Moral Story with Pictures.

Hindi Short Story for Kids - बुद्धिमान पुत्र 


Hindi Short Story for Kid



सेठ खेमचंद बहुत ही धनवान व्यक्ति थे। उनके पास बहुत सारी जमीन थी। ( Hindi Short Story for kids ) दूर - दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। बहुत दूर - दूर के लोग भी उसे जानते भी थे। सेठ के तीन पुत्र थे। सेठ के तीनों पुत्रों कि प्रवृति बिल्कुल अलग अलग थी। सबसे बड़ा रमेशचंद्र आलसी और निखटू था। दूसरा पुत्र सुरेशचंद्र स्वास्थ्य से बलिष्ठ और पेटू स्वभाव का था। सबसे छोटा महेशचंद्र बुद्धिमान व परिश्रमी था। 

समय बीतने के साथ ही सेठ बूढा होता गया। अब उसका स्वास्थ्य भी ठीक न रहता था। उसे अपने व्यापार की चिंता होने लगी। कौन उसकी देख - रेख करेगा और इसे आगे बढ़ाएगा? अपने पुत्रों में से किसे वह ये जिम्मेदारी सौंपे? तीनों में से कौन सबसे अधिक योग्य है? हमेशा उस सेठ को यही चिंता सताती रहती। 

योग्य पुत्र की पहचान करने के लिए उसने अपने तीनों पुत्रों कि परीक्षा लेने की सोची। 

अगले दिन सेठ ने तीनों पुत्रों को बुलाया और तीनों को दस - दस रुपये देते हुए कहा “ जो भी पुत्र कल अपना कक्ष इस दस रुपये से खरीदे गए सामान से पूरा भर देगा, उसे ही मैं व्यापार की सारी जिम्मेदारी सौप दूंगा।" 


यह सुनकर तीनों पुत्र विचार करने लगे कि दस रूपए में आखिर ऐसा क्या खरीदे जिससे पूरा कक्ष भर जाए। 

पहले पुत्र रमेशचंद्र ने एक मजदूर को दस रुपए दिए और उसे कुँए से पानी लाकर उसका कमरा भर देने का आदेश दिया। परंतु पानी कमरे में स्थिर होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जैसे ही मजदूर पनी ला कर कक्ष म डालते सारा पनी बाहर बेह जाता। दूसरे पुत्र सुरेशचंद्र ने इस रुपए से कई बोरा भूसा खरीदा और कमरे में भरने लगा, लेकिन कमरा पूरा भर न पाया। 

सबसे छोटे पुत्र ने कुछ खरीदने से पहले काफी देर विचार किया और फिर बाजार से दस रुपाए की मोमबत्तियाँ खरीद लाया। 

शाम को सेठ तीनों पुत्रों के कमरों का निरीक्षण करने हेतु निकला। पहले पुत्र के कमरे से तो पानी अभी भी बह रहा था और वह सिर पर हाथ रखे बैठा था जो उसकी उदासीनता को प्रकट कर रहा था। दूसरे पुत्र का कमरा भूसे से भरा हुआ था जो अभी भी खाली था। सेठ को अपने दो पुत्रों से बहुत निराश मिली। 

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अब वह अपने तीसरे पुत्र के कमरे की ओर बढ़ा। उसने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया तो देखा पूरा कमरा मोमबत्तियों के प्रकाश से जगमगा रहा था। यह देख कर सेठ चौक गए और उन्होंने अपने पुत्र से पूछा तुमने ये मोमबत्तियां क्यों जलाई है। सेठ के पुत्र ने उत्तर दिया, " पिताजी देखिए आपने जो दस रूपए मुझे दिए थे मैंने उसके ये मोमबत्तियां लेे ली। इन मोमबत्तियों से निकलती हुई प्रकाश ने इस पूरे कक्ष को भर दिया है। इस कक्ष का एक भी कोना ऐसा नहीं है जो खाली हो।"

सेठ भी अपने छोटे पुत्र महेशचंद्र की बुद्धिमता को देख कर चकित रह गया। ( Hindi Short Story for kids ) और वह अत्यधिक हर्षित हुआ उसकी भूरि - भूरि प्रशंसा की और कहा " इस व्यापार के लिए तुम्हीं सबसे योग्य हो और तुम्ही इसके हकदार हो "! यह कहकर सेठ ने अपना सारा व्यापार अपने सब से छोटे पुत्र के नाम कर दिया। 

सीख:- 

इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है कि हमारी बुद्धिमता ही हमारी सब से बड़ी ताकत है। बुद्धि के बल पर हम पूरे संसार को जीत सकते है। 

Moral of this story with moral:-

From this story, we learn that our intelligence is our greatest strength. We can win the whole world on the strength of wisdom.

Read More:-

Thank you so much for reading this Hindi Short Story for Kids with Moral. We should always use our intelligence in every condition. This short story in Hindi gives us a moral value which is very important for kids. If you liked this Hindi Short Story with moral for kids, please do comments and share your thoughts. You can read many more moral stories in Hindi, motivational stories in Hindi, magical stories in Hindi and many more.

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