Tenali Rama Short Story Hindi - मातृभाषा क्या? – Matribhasha Kya?

Tenali Rama Short Story Hindi - मातृभाषा क्या? – Matribhasha Kya?

Tenali Rama Short Story in Hindi : This story is a Tenalirama Story. This Tenali Rama Short Story in Hindi is titled as “ Matribhasa Kya?”. We all are familiar with the name Tenali Rama. I hope you will enjoy this in TenaliRama Story in Hindi with moral.

Tenali Rama Short Story in Hindi : मातृभाषा क्या?

 
Tenali Rama Short Story


बहुत समय पहले की बात है। उसमें विजय नगर में महाराज कृष्णदेव राय का शासन था। ( tenali rama short story ) वाह बहुत ही कुशल शासक थे। उनके दरबार में एक मंत्री था। ( short story in hindi ) जिसका नाम तेनालीराम था। तेनालीराम बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति थे और महाराज कृष्णदेव राय के प्रिय मंत्री थे। उनकी बुद्धिमता की चर्चा दूर दूर तक फैली हुई थी। हर कोई उनके बुद्धि का परीक्षा लेना चाहता था। 

तेनालीराम के बुद्धिमान होने एवं महाराज कृष्ण देव राय के प्रिय होने की वजह से दरबार के बाकी मंत्री गण तेनालीराम से बहुत जलते थे। वह हमेशा तेनालीराम को महाराज के नजरों के सामने नीचा दिखाने का प्रयत्न करते रहते थे। परंतु तेनालीराम अपनी अक्लमंदी से सारे मंत्रियों के प्रयत्न को विफल कर देता। 

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ऐसे ही एक बार महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में एक महान पंडित आए। ( tenali rama short story ) उन पंडित को दुनिया के कई सारी भाषाओं में महारत हासिल था। वह एक साथ एक ही सांस में बहुत सारी भाषाएं बोल लेते थे। एक वाक्य बोलने में ही वह दो-तीन भाषा प्रयोग कर लेते थे। ( short story in hindi ) वह पंडित दरबार में आए और महाराज के सामने दरबार में उपस्थित सभी मंत्रियों को चुनौती दिया कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो उनके मातृभाषा का पता लगा सके। उन्होंने तेनालीराम का भी जिक्र किया। उस पंडित ने कहा," महाराज मैंने आप के मंत्री तेनालीराम के बारे में बहुत सुना है। परंतु मैं उसे बुद्धिमान नहीं मानता। मुझे उसकी परीक्षा लेनी है। अगर वह मेरी मातृभाषा का पता लगा लेगा तभी मैं उसे बुद्धिमान समझूंगा।"

उस पंडित की बात सुनकर दरबार में उपस्थित सभी मंत्री अचंभित रह गए। सभी सोचने लगे कि इस महान पंडित, जोकि अलग-अलग भाषाओं में विद्वान है, उसकी मातृभाषा का कैसे पता लगाया जाए। कभी तेनालीराम ने महाराज के आदेश से पंडित की चुनौती को स्वीकार कर लिया। और तेनालीराम ने महाराज से एक दिन का समय मांगा। तेनालीराम को एक दिन का समय दे दिया गया। 

अगले दिन जब जब महाराज का दरबार लगा तो वह पंडित और सारे मंत्री का निर्माण उपस्थित हुए। राजा ने तेनालीराम से प्रश्न किया कि क्या तुम्हें विद्वान पंडित के मातृभाषा का पता चला। तेनालीराम ने उत्तर दिया," हां महाराज, इस पंडित की मातृभाषा मराठी है। "

Tenali Rama Short Story


वहां उपस्थित सभी मंत्री वह पंडित बिल्कुल चौक गए। ( Hindi Short Story with moral for kids ) पंडित ने कहा ऐसा नहीं हो सकता। तुम्हें मेरी मातृभाषा का पता कैसे चला। मेरी मातृभाषा मराठी ही है परंतु तुम्हे इसका कैसे पता चला? 

तब तेनालीराम ने दरबार में उपस्थित सभी को बताया कि, " कल रात जब यह पंडित अपने कक्ष में सो रहे थे तो चुपके से मै इनके कक्ष में गया था। मैं वहां जाकर इनके शरीर पर एक पंख से गुदगुदी कर रहा था। औरत भी इन्होंने मराठी में कहा कि कौन मुझे परेशान कर रहे हैं। महाराज, यह पंडित उस समय अपनी गहरी नींद में थे। और कोई भी व्यक्ति नींद में अपनी विद्वता का उपयोग नहीं कर सकता। नींद में केवल वह अपनी मातृभाषा का ही प्रयोग करेगा। जब इन्होंने मराठी में कहा तभी मैं समझ गया कि इनकी मातृभाषा मराठी है।" 

महाराज भी तेनालीराम पर बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें शाबाशी दी। ( tenali rama short story in hindi with moral ) बहुत विद्वान पंडित भी अब तेनालीराम की विद्वता को मानने लगे। अपने अहंकार को त्याग दिया।


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