Hindi Short Story for class 4 with Moral for Kids – बिना स्वार्थ के मदद करें

Hindi Short Story for class 4 with Moral for Kids – बिना स्वार्थ के मदद करें

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Hindi Short Story for class 4 - बिना स्वार्थ के मदद करें


Hindi Short Story for class 4


एक गांव में एक गरीब व्यक्ति रहता था। ( Hindi Short Story for class 4 ) वह गरीब तो था ही परंतु गरीब होने के साथ-साथ बहुत ईमानदार भी था। वह अपनी जीविका चलाने के लिए गांव में रंगाई पुताई का काम करता था। ( short story in Hindi with moral ) गांव वालों के घर, कुर्सी, टेबल, फर्नीचर इत्यादि को रंगता था। 

वह प्रतिदिन अपनी इस काम से अपने लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर लेता था। वह हमेशा किसी बड़े काम के इंतजार में रहता था। जिससे उसे थोड़ी ज्यादा पैसे मिले और उसकी जीविका सुधर पाए। परंतु अभी तक मुझसे कोई भी बड़ा कार्य नहीं मिला था। 

एक नहीं उस गांव के सबसे अमीर जमींदार ने उसे बुलाया। ( short story in Hindi with moral ) उस जमींदार ने उसे कहा कि वह उसकी नाव को रंग दे। जमींदार ने उस पेंटर से कहा," यही पास की नदी में मेरी नाव लगी है। वह काफी पुरानी सी और भद्दी सी दिखती है। तुम मेरे लिए उस नाव को रंग दो। उसे बिल्कुल नया जैसा बना दो। इसके बदले तुम्हें जितने पैसे चाहिए होंगे मैं दूंगा।" 

पेंटर ने जमींदार से कहा," आप बिल्कुल चिंता ना करें। मैं आपकी नाव को बिल्कुल नया कर दूंगा। ( Hindi Short Story for class 4 ) आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा। आप मुझे इसके बदले ₹500 दे दीजिएगा। " 

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जमींदार मान गए। फिर पेंटर अपने घर गया और रंगाई पुताई का सारा सामान लेकर नदी किनारे पहुंचा। वहां उसने उस जमींदार के नाव को देखा। उसने उसने उस नाव को रंगना शुरू किया। वह पूरे दिल से अपना काम कर रहा था। तभी उसने देखा कि नाव के सतह पर एक छेद है। अगर उसने बिना उस छेद को बंद किए उस नाव को रंग दिया और कोई उस नाव को लेकर नदी में चला गया तो यह नाव डूब सकती है। और उस पर सवार लोगों की जान भी जा सकती है। 

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यह सोचकर उसने पहले नाव के उस छेद को बंद करने का निश्चय किया। ( Hindi Short Story for class 4 ) उसने उस नाव के छेद की मरम्मत की और उसके बाद उस नाव को अच्छे से रंग दिया। अब वह नाव बिल्कुल नई जैसी लग रही थी। उस दिन उसे नाव को रंगते रंगते काफी रात हो गई। इसीलिए वह अपना काम समाप्त करके जमींदार के यहां जाने के बजाय अपने घर चला आया। उसने सोचा इतनी रात को जमींदार के पास जाकर पैसे मांगना उचित नहीं होगा। मैं कल जमींदार के पास आकर पैसे ले लूंगा। 

इधर अगले दिन प्रातः जमींदार ने सोचा की पेंटर ने नाव को रंग ही दिया होगा। उसने अपनी पत्नी और अपने बच्चों को नाव की सवारी करने के लिए भेज दिया। जमींदार की पत्नी और बच्चे नाव की सवारी करने के लिए नदी में चले गए। तभी कुछ समय बाद उधर से जमींदार का भाई आया। ( short story in Hindi with moral ) जब जमींदार ने उसे बताया कि उसने अपनी पत्नी और बच्चों को नाव की सैर करने के लिए भेजा है तो जमींदार का भाई बिल्कुल सहम गया। उसने अपने बड़े भाई से कहा कि भैया उस नाव में तो एक छेद था। उसने उसे नदी की सवारी करने वाले की जिंदगी को खतरा है। कहीं भाभी और आपके बच्चों के साथ कोई अनहोनी ना हो जाए। 

यह सुनकर जमींदार डर गया और भागता हुआ नदी के तरफ बढ़ने लगा। ( Hindi Short Story for class 4 ) तभी उसने देखा कि उसकी बीवी और बच्चे वापस घर की तरफ आ रहे हैं। वह बिल्कुल सुरक्षित थे। उसके बच्चों ने आकर उसे बताया कि नाव का सफर बहुत मजेदार था। जमींदार को अपनी बीवी और बच्चों को देख कर बहुत खुशी हुई और मैं अपने घर आ गया। 

Hindi Short Story for class 4


उसी दिन दोपहर में वह पेंटर जमींदार के घर पहुंचा। पेंटर ने जमींदार से अपने पैसे मांगे और साथ ही पेंटर ने बताया कि कैसे उसने नाव के छेद की मरम्मत की। पेंटर की बात सुनकर जमींदार बिल्कुल भावुक हो गया और उसने पेंटर को गले से लगा लिया। जमींदार ने कहा," तुम्हें अंदाजा नहीं है तुमने उस छेद को बंद करके किसी की जान बचा लिया। मैं तुम्हारा हमेशा आभारी रहूंगा।" इतना कहकर वह जमींदार अपने घर गया और अंदर से उसने पेंटर को देने के लिए पैसे ले आए। 

उसने पेंटर को ₹500 के बदले ₹5000 दिए। ( Hindi Short Story for class 4 ) विंटर यार देख कर क्यों किया और उसने कहा कि हमारी बात तो ₹500 की हुई थी। जमींदार ने खुश होकर उससे कहा कि यह मेरी तरफ से तुम्हारे लिए इनाम है। तुम इन पैसों को रख लो। आगे से मुझे कोई भी काम होगा तो मैं तुम्हें ही बुलाऊंगा। वह गरीब व्यक्ति ₹5000 पाकर बहुत खुश हुआ और खुशी-खुशी अपने घर आ गया। ( Hindi Short Story for class 4

सीख:-

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें बिना अपना स्वार्थ सोचे दूसरों की मदद करनी चाहिए।

Moral of this short story in Hindi with moral:-

This story teaches us that we should help others without thinking about our selfishness.

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